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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 154 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 154 • ऋचा / मन्त्र 1

10.154.1

Mantra ID: 10.154.1

सोम॒ एके॑भ्यः पवते घृ॒तमेक॒ उपा॑सते । येभ्यो॒ मधु॑ प्र॒धाव॑ति॒ ताँश्चि॑दे॒वापि॑ गच्छतात् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.154.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

कुछ पितरों के लिए सोमरस निचोड़ा जाता है और कुछ घी का सेवन करते हैं. हे प्रेत! तुम उन पितरों के पास जाओ, जिनके लिए मधु बहता है. (१)

EN English Translation

Some fathers are squeezed to some of the somras and some consume ghee. O ghost! You go to the fathers for whom honey flows. (1)

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