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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 164 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 164 • ऋचा / मन्त्र 1

10.164.1

Mantra ID: 10.164.1

अपे॑हि मनसस्प॒तेऽप॑ क्राम प॒रश्च॑र । प॒रो निरृ॑त्या॒ आ च॑क्ष्व बहु॒धा जीव॑तो॒ मनः॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.164.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मेरे मन पर अधिकार करने वाले दुःस्वप्न देव! तुम यहां से हटो, भाग जाओ और दूर घूमो. हे दूरस्थित पाप देवता! निर्त्ति से तुम कहो कि जीवित व्यक्ति के मनोरथ अनेक होते हैं. (१)

EN English Translation

O you nightmare God who has taken over my mind! You move from here, run away and walk away. O remote sin god! You must say in a judgment that the desires of a living person are many. (1)

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