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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 17 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 17 • ऋचा / मन्त्र 13

10.17.13

Mantra ID: 10.17.13

यस्ते॑ द्र॒प्सः स्क॒न्नो यस्ते॑ अं॒शुर॒वश्च॒ यः प॒रः स्रु॒चा । अ॒यं दे॒वो बृह॒स्पतिः॒ सं तं सि॑ञ्चतु॒ राध॑से ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.17.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम्हारा जो रस बाहर आ गया है अथवा तुम्हारा जो लता भाग खुच के नीचे गिर गया है, हमें धन देने के लिए बृहस्पति देव उन दोनों को जल से मिलावें. (१३)

EN English Translation

Hey Mon! May the juice that has come out of you or the part of yours that has fallen under the latch, may Jupiter meet them both with water to give us wealth. (13)

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