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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 172 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 172 • ऋचा / मन्त्र 3

10.172.3

Mantra ID: 10.172.3

पि॒तु॒भृतो॒ न तन्तु॒मित्सु॒दान॑वः॒ प्रति॑ दध्मो॒ यजा॑मसि ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.172.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अन्न के स्वामियों के समान शोभन दान वाले हम धागों के समान इस यज्ञ का विस्तार करते हैं एवं उस यज्ञ से उषा की पूजा करते हैं. (३)

EN English Translation

We extend this yajna like threads and worship Usha with that yajna. (3)

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