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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 172 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 172 • ऋचा / मन्त्र 4

10.172.4

Mantra ID: 10.172.4

उ॒षा अप॒ स्वसु॒स्तमः॒ सं व॑र्तयति वर्त॒निं सु॑जा॒तता॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.172.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उषा अपनी बहिन रात का अंधकार मिटाती है एवं अपना रथ भली प्रकार चलाती है. (४)

EN English Translation

Usha removes the darkness of the night and drives her chariot well. (4)

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