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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 174 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 174 • ऋचा / मन्त्र 1

10.174.1

Mantra ID: 10.174.1

अ॒भी॒व॒र्तेन॑ ह॒विषा॒ येनेन्द्रो॑ अभिवावृ॒ते । तेना॒स्मान्ब्र॑ह्मणस्पते॒ऽभि रा॒ष्ट्राय॑ वर्तय ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.174.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ब्रह्मणस्पति! जिस हवि से इंद्र ने सब कुछ प्राप्त किया है, हम उसी हवि से यज्ञ करते हैं. तुम हमें राज्यप्राप्ति में लगाओ. (१)

EN English Translation

O Brahmaspati! From the havi from which Indra has received everything, we perform yajna with the same havi. You put us in the kingdom. (1)

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