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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 175 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 175 • ऋचा / मन्त्र 4

10.175.4

Mantra ID: 10.175.4

ग्रावा॑णः सवि॒ता नु वो॑ दे॒वः सु॑वतु॒ धर्म॑णा । यज॑मानाय सुन्व॒ते ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.175.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पत्थरो! सविता देव सोमयज्ञ करने वाले यजमान के लिए सोमरस निचोड़ने के काम में तुम्हें लगावें. (४)

EN English Translation

O stones! Savita Dev should engage in the work of squeezing the somras for the host who performs somayagna. (4)

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