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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 18 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 3

10.18.3

Mantra ID: 10.18.3

इ॒मे जी॒वा वि मृ॒तैराव॑वृत्र॒न्नभू॑द्भ॒द्रा दे॒वहू॑तिर्नो अ॒द्य । प्राञ्चो॑ अगाम नृ॒तये॒ हसा॑य॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.18.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये जीते हुए लोग मरे हुए व्यक्तियों के पास से लौट आवें. आज हमारा पितृमेध यज्ञ कल्याणकारी हो. हम नृत्य और हास्य की ओर उन्मुख हों एवं अधिक लंबी अवस्था धारण करें. (३)

EN English Translation

Let these living people return from the dead. Today our Pitramedha Yajna be beneficial. Let's be oriented towards dance and humor and take a longer stage. (3)

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