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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 24 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 2

10.24.2

Mantra ID: 10.24.2

त्वां य॒ज्ञेभि॑रु॒क्थैरुप॑ ह॒व्येभि॑रीमहे । शची॑पते शचीनां॒ वि वो॒ मदे॒ श्रेष्ठं॑ नो धेहि॒ वार्यं॒ विव॑क्षसे ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.24.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! यज्ञों, स्तुतियों तथा हव्यों के द्वारा हम तुमसे अभिलषित धन मांगते हैं. हे कर्मपालक इंद्र! तुम सभी कर्मो की रक्षा करते हो. तुम सोमरस का विशेष नशा चढ़ने पर हमें उत्तम धन देकर महान्‌ बनो. (२)

EN English Translation

O Indra! Through yajnas, praises and sacrifices, we ask you for the money we want. O karma-keeper Indra! You protect all the deeds. You become great by giving us the best money when you climb the special intoxication of Someras. (2)

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