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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 24 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 24 • ऋचा / मन्त्र 5

10.24.5

Mantra ID: 10.24.5

विश्वे॑ दे॒वा अ॑कृपन्त समी॒च्योर्नि॒ष्पत॑न्त्योः । नास॑त्यावब्रुवन्दे॒वाः पुन॒रा व॑हता॒दिति॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.24.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! मंथन के समय मिली हुई अरणियों से जब आग की चिनगारियां निकलने लगीं तब सारे देवों ने तुम्हारी प्रशंसा की एवं कहा-“ऐसा दोबारा करो.” (५)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! When the agni sparks started coming out of the arrows found at the time of the churning, all the gods praised you and said, "Do this again." (5)

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