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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 25 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 25 • ऋचा / मन्त्र 4

10.25.4

Mantra ID: 10.25.4

समु॒ प्र य॑न्ति धी॒तयः॒ सर्गा॑सोऽव॒ताँ इ॑व । क्रतुं॑ नः सोम जी॒वसे॒ वि वो॒ मदे॑ धा॒रया॑ चम॒साँ इ॑व॒ विव॑क्षसे ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.25.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! कलश जल निकालने के लिए जैसे कुएं में जाता है, वैसे ही हमारी स्तुतियां तुम्हारे पास जाती हैं. तुम महान्‌ हो, इसलिए हमारे जीवन के निमित्त इस यज्ञ को इस प्रकार धारण करो, जिस प्रकार लोग चमस को धारण करते हैं. (४)

EN English Translation

Hey Mon! Just as the urn goes into the well to draw water, so do our praises go to you. You are great, so for the sake of our lives, hold this yajna in the same way that people wear a spoon. (4)

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