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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 27 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 13

10.27.13

Mantra ID: 10.27.13

प॒त्तो ज॑गार प्र॒त्यञ्च॑मत्ति शी॒र्ष्णा शिरः॒ प्रति॑ दधौ॒ वरू॑थम् । आसी॑न ऊ॒र्ध्वामु॒पसि॑ क्षिणाति॒ न्य॑ङ्ङुत्ता॒नामन्वे॑ति॒ भूमि॑म् ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.27.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सूर्य अपनी किरणों द्वारा जल सोख लेते हैं, अपने समीप गए हुए जल का उपभोग करते है तथा वर्षा का जल अपनी किरणों द्वारा सबके सिरों पर बरसाते हैं. सूर्य अपने मंडल में स्थित होकर अपनी ऊर्ध्वगामिनी किरणों को फेंकते हैं एवं किरणसमूह के साथ धरती पर विस्तृत प्रकाश का अनुगमन करते हैं. (१३)

EN English Translation

The sun absorbs water through its rays, consumes the water that has gone near it and the rain water is rained on everyone's heads by its rays. The Sun is located in its circle and throws away its vertical rays and follows the wide light on the earth with a group of rays. (13)

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