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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 27 • Mantra / Rik 18

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 18

10.27.18

Mantra ID: 10.27.18

वि क्रो॑श॒नासो॒ विष्व॑ञ्च आय॒न्पचा॑ति॒ नेमो॑ न॒हि पक्ष॑द॒र्धः । अ॒यं मे॑ दे॒वः स॑वि॒ता तदा॑ह॒ द्र्व॑न्न॒ इद्व॑नवत्स॒र्पिर॑न्नः ॥ (१८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.27.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अनेक प्रकार से प्रजापति को पुकारते हुए नाना गतियों वाले अंगिरा आए. उन में से आधे ऋषि प्रजापति के लिए हव्य पकाते हैं, आधे नहीं पकाते. सूर्य देव ने यह बात मुझसे कही है. काष्ठ एवं घी का भोजन करने वाले अन्नि प्रजापति को धारण करते हैं. (१८)

EN English Translation

Calling Prajapati in many ways, Angira with various speeds came. Half of them cook havya for Rishi Prajapati, half do not cook. Surya Dev has told this to me. Those who eat wood and ghee wear Anni Prajapati. (18)

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