Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 27 • Mantra / Rik 20

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 20

10.27.20

Mantra ID: 10.27.20

ए॒तौ मे॒ गावौ॑ प्रम॒रस्य॑ यु॒क्तौ मो षु प्र से॑धी॒र्मुहु॒रिन्म॑मन्धि । आप॑श्चिदस्य॒ वि न॑श॒न्त्यर्थं॒ सूर॑श्च म॒र्क उप॑रो बभू॒वान् ॥ (२०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.27.20 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मुझ शत्रुमारक इंद्र के रथ में जुड़े हुए दो सुपूजित एवं शत्रुओं के पास पहुंचने वाले हरि नामक घोड़ों को मत रोको. बार-बार उनकी स्तुति करो. वर्षा का जल भी इंद्र की गति को व्याप्त करता है. मेघ बिना किसी श्रम के उन स्थानों को पार कर जाते हैं. (२०)

EN English Translation

Don't stop the two sub-priests who are connected in the chariot of Indra and the horses named Hari who are approaching the enemies. Praise them again and again. Rain water also pervades indra's motion. The clouds cross those places without any labour. (20)

卐 HinduText AI