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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 28 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 1

10.28.1

Mantra ID: 10.28.1

विश्वो॒ ह्य१॒॑न्यो अ॒रिरा॑ज॒गाम॒ ममेदह॒ श्वशु॑रो॒ ना ज॑गाम । ज॒क्षी॒याद्धा॒ना उ॒त सोमं॑ पपीया॒त्स्वा॑शितः॒ पुन॒रस्तं॑ जगायात् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.28.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के पुत्र वसुक की स्त्री कहती है-“इंद्र के अतिरिक्त सभी देव हमारे यज्ञ में आए हैं. मेरे ससुर इंद्र नहीं आए, यह आश्चर्य है. वे आते तो भुना हुआ जौ का सत्तू खाते और सोमरस पीते. वे शोभन आदर करके फिर अपने घर चले जाते.” (१)

EN English Translation

The woman of Indra's son Vasuk says, "All the gods except Indra have come to our yagna. My father-in-law Indra did not come, it's surprising. When they come, they eat roasted barley sattu and drink somras. They would go home again with respect." (1)

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