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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 27 • Mantra / Rik 24

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 24

10.27.24

Mantra ID: 10.27.24

सा ते॑ जी॒वातु॑रु॒त तस्य॑ विद्धि॒ मा स्मै॑ता॒दृगप॑ गूहः सम॒र्ये । आ॒विः स्वः॑ कृणु॒ते गूह॑ते बु॒सं स पा॒दुर॑स्य नि॒र्णिजो॒ न मु॑च्यते ॥ (२४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.27.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋषि! सूर्य ही तुम्हारे प्राणाधार हैं. तुम यज्ञ में सूर्य का यह स्वरूप जानो. उसे छिपाना मत. सूर्य का वह गमन किरणों के रूप में जाकर लोक को प्रकाशित करता है. सूर्य स्वर्ग का आविष्कार करते हैं एवं जल को सोखते हैं. सूर्य अपनी गति कभी नहीं छोड़ते. (२४)

EN English Translation

O sage! The sun is your lifeblood. You know this form of the sun in the yajna. Don't hide him. That movement of the sun goes as rays and illuminates the folk. The sun invents heaven and absorbs water. The sun never leaves its speed. (24)

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