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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 30 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 30 • ऋचा / मन्त्र 14

10.30.14

Mantra ID: 10.30.14

एमा अ॑ग्मन्रे॒वती॑र्जी॒वध॑न्या॒ अध्व॑र्यवः सा॒दय॑ता सखायः । नि ब॒र्हिषि॑ धत्तन सोम्यासो॒ऽपां नप्त्रा॑ संविदा॒नास॑ एनाः ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.30.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अध्वर्यु मित्रो! धन से युक्त व जीवों के लिए लाभकारी जल हमारे यज्ञ की ओर आ रहे हैं. तुम जल को स्थापित करो. इन जलों का वर्षा के देव अर्थात्‌ अपांनपात्‌ से परिचय है. सोमरस से मिलाने योग्य इस जल को कुशों पर स्थापित करो. (१४)

EN English Translation

O you guys! Water containing wealth and beneficial for living beings is coming towards our yajna. You install the water. These waters are introduced to the God of Rain i.e. The Apanpat. Install this water to be mixed with somras on the kushas. (14)

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