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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 39 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 8

10.39.8

Mantra ID: 10.39.8

यु॒वं विप्र॑स्य जर॒णामु॑पे॒युषः॒ पुनः॑ क॒लेर॑कृणुतं॒ युव॒द्वयः॑ । यु॒वं वन्द॑नमृश्य॒दादुदू॑पथुर्यु॒वं स॒द्यो वि॒श्पला॒मेत॑वे कृथः ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.39.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! तुमने बुढ़ापे को प्राप्त एवं मेधावी कलि ऋषि को दुबारा जवान बना दिया था. तुमने वंदन नामक ऋषि को कुएं से निकाला था एवं लंगड़ी विश्‍्पला को लोहे का पैर लगाकर चलने योग्य बना दिया था. (८)

EN English Translation

O aschinikumaro! You made the sage the old age and the bright bud again young. You had pulled out a sage named Vandan from the well and made the lame Vishwapala walkable by putting an iron foot. (8)

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