Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 40 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 40 • ऋचा / मन्त्र 6

10.40.6

Mantra ID: 10.40.6

यु॒वं क॒वी ष्ठः॒ पर्य॑श्विना॒ रथं॒ विशो॒ न कुत्सो॑ जरि॒तुर्न॑शायथः । यु॒वोर्ह॒ मक्षा॒ पर्य॑श्विना॒ मध्वा॒सा भ॑रत निष्कृ॒तं न योष॑णा ॥ (६)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.40.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मेधावी अश्विनीकुमारो! तुम लोग रथ पर बैठकर कुत्स के समान स्तोता के घर जाते हो. तुम्हारे मधु को मधुमक्खियां इस प्रकार अपने मुंह में भर लेती हैं, जिस प्रकार युवती संभोग में रत रहती है. (६)

EN English Translation

O brilliant Ashwinikumaro! You sit on a chariot and go to the house of the parrot like a dog. The bees fill your honey in their mouths in this way, just as the young woman is engaged in sexual intercourse. (6)

卐 HinduText AI