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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 48 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 4

10.48.4

Mantra ID: 10.48.4

अ॒हमे॒तं ग॒व्यय॒मश्व्यं॑ प॒शुं पु॑री॒षिणं॒ साय॑केना हिर॒ण्यय॑म् । पु॒रू स॒हस्रा॒ नि शि॑शामि दा॒शुषे॒ यन्मा॒ सोमा॑स उ॒क्थिनो॒ अम॑न्दिषुः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.48.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब यजमान मुझे सोमरस एवं स्तुतियों से प्रसन्न करते हैं, तब मैं आयुधों के द्वारा शत्रु की गायों, घोड़ों, धनों एवं दुधारू पशुओं को जीतता हूं तथा हव्यदाता यजमान के कल्याण के लिए अनेक शस्त्रों को तेज करता हूं. (४)

EN English Translation

When the yajman please me with somrus and praises, I conquer the enemy's cows, horses, riches, and milch animals through the armaments and intensify many weapons for the welfare of the yajman. (4)

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