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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 49 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 6

10.49.6

Mantra ID: 10.49.6

अ॒हं स यो नव॑वास्त्वं बृ॒हद्र॑थं॒ सं वृ॒त्रेव॒ दासं॑ वृत्र॒हारु॑जम् । यद्व॒र्धय॑न्तं प्र॒थय॑न्तमानु॒षग्दू॒रे पा॒रे रज॑सो रोच॒नाक॑रम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.49.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं वह इंद्र हूं, जिसने नववास्त्व और बृहद्रथ को वृत्र के समान मारा था. मैंने बढ़ते हुए एवं प्रसिद्ध दोनों असुरों को उज्ज्वल लोक से बाहर निकाल दिया था. (६)

EN English Translation

I am the Indra who hit Navavasattva and Brihadratha like Vritra. I had driven out both the growing and famous asuras from the bright realm. (6)

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