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10.52.1
विश्वे॑ देवाः शा॒स्तन॑ मा॒ यथे॒ह होता॑ वृ॒तो म॒नवै॒ यन्नि॒षद्य॑ । प्र मे॑ ब्रूत भाग॒धेयं॒ यथा॑ वो॒ येन॑ प॒था ह॒व्यमा वो॒ वहा॑नि ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.52.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अग्नि ने मन ही मन कहा-“हे विश्वेदेवो। तुमने मुझे होता के रूप में वरण किया है. मुझे यहां बैठकर जो मंत्र पढ़ना है, वह मुझे बताओ. मेरा और तुम्हारा भाग कौन सा है, यह मुझे बताओ. मुझे वह मार्ग भी बताओ, जिससे मैं हव्य तुम्हारे पास ले जाउं. (१)
EN English Translation
The agni said to himself, "O Visves. You have chosen me as would have. Tell me the mantras I have to sit here and read. Tell me which part of me and yours is. Tell me the way in which I may take you. (1)