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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 52 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 3

10.52.3

Mantra ID: 10.52.3

अ॒यं यो होता॒ किरु॒ स य॒मस्य॒ कमप्यू॑हे॒ यत्स॑म॒ञ्जन्ति॑ दे॒वाः । अह॑रहर्जायते मा॒सिमा॒स्यथा॑ दे॒वा द॑धिरे हव्य॒वाह॑म् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.52.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह जो होता है, वह क्या काम करता है? वह यजमान के द्वारा होम किया हुआ हव्य- वहन करता है. उस हव्य को देव धारण करते हैं. प्रतिदिन और प्रतिमास हवन होता है. इस कार्य के लिए देवों ने मुझे नियुक्त किया है. (३)

EN English Translation

What happens, what does it do? He carries the home made by the host. That havya is possessed by God. There is a daily and idolous havan. The gods have appointed me for this work. (3)

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