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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 55 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 7

10.55.7

Mantra ID: 10.55.7

ऐभि॑र्ददे॒ वृष्ण्या॒ पौंस्या॑नि॒ येभि॒रौक्ष॑द्वृत्र॒हत्या॑य व॒ज्री । ये कर्म॑णः क्रि॒यमा॑णस्य म॒ह्न ऋ॑तेक॒र्ममु॒दजा॑यन्त दे॒वाः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.55.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वज्रधारी इंद्र ने इन मरुतों के साथ वर्षा करने वाली शक्ति प्राप्त की एवं वृत्र की हत्या करके वर्षा द्वारा धरती को सींचा. महान्‌ इंद्र द्वारा किए गए वर्षा कार्य में मरुद्गण स्वयं ही सहायक बनते हैं. (७)

EN English Translation

Vajradhari Indra gained the power of rain with these maruts and irrigated the earth by rain by killing Vritra. The deserts themselves help in the rain work done by the great Indra. (7)

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