Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 57 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 57 • ऋचा / मन्त्र 1

10.57.1

Mantra ID: 10.57.1

मा प्र गा॑म प॒थो व॒यं मा य॒ज्ञादि॑न्द्र सो॒मिनः॑ । मान्तः स्थु॑र्नो॒ अरा॑तयः ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.57.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हम सुपथ से विचलित न हों तथा सोमरस वाले यजमान के यज्ञ से दूर न रहें. शत्रु हमारे बीच में न आवें. (१)

EN English Translation

O Indra! Let us not deviate from the path and do not stay away from the yajna of the host of Somras. Let the enemy not come among us. (1)

卐 HinduText AI