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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 2

10.61.2

Mantra ID: 10.61.2

स इद्दा॒नाय॒ दभ्या॑य व॒न्वञ्च्यवा॑नः॒ सूदै॑रमिमीत॒ वेदि॑म् । तूर्व॑याणो गू॒र्तव॑चस्तमः॒ क्षोदो॒ न रेत॑ इ॒तऊ॑ति सिञ्चत् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.61.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे रुद्रदेव स्तोताओं को धन देने के लिए एवं शत्रुओं को न्ट करने के लिए यज्ञवेदी पर प्रकट हुए एवं शत्रुनाशक अस्त्र उन्हें दिए. बादल जिस प्रकार जल बरसाते हैं, उसी प्रकार शीघ्र गमन वाले एवं उद्यत-वचन रुद्र ने चारों ओर अपनी शक्ति दिखाई. (२)

EN English Translation

They appeared on the yajnavedi to give money to rudradeva stothas and to treat the enemies and gave them the enemy-destroying weapons. Just as the clouds rain water, so did the fast-moving and prolific Rudra show his power all around. (2)

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