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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 4

10.61.4

Mantra ID: 10.61.4

कृ॒ष्णा यद्गोष्व॑रु॒णीषु॒ सीद॑द्दि॒वो नपा॑ताश्विना हुवे वाम् । वी॒तं मे॑ य॒ज्ञमा ग॑तं मे॒ अन्नं॑ वव॒न्वांसा॒ नेष॒मस्मृ॑तध्रू ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.61.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्वर्गपुत्र अश्विनीकुमारो! जिस समय काली रात लाल रंग वाली उषाओं में बदलने लगती है, उस समय मैं तुम्हारा आह्वान करता हूं. मेरे हव्य अन्न की अभिलाषा करने के लिए तुम मेरे यज्ञ में आओ. अश्चों के समान उसे ग्रहण करो और मेरे प्रति द्रोह को भुला दो. (४)

EN English Translation

O son of heaven, Ashwinikumaro! At the time when the black night begins to turn into red ushas, I call upon you. You come to my yajna to wish for my good food. Accept him like a curse and forget the hatred towards me. (4)

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