Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 61 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 61 • ऋचा / मन्त्र 9

10.61.9

Mantra ID: 10.61.9

म॒क्षू न वह्निः॑ प्र॒जाया॑ उप॒ब्दिर॒ग्निं न न॒ग्न उप॑ सीद॒दूधः॑ । सनि॑ते॒ध्मं सनि॑तो॒त वाजं॒ स ध॒र्ता ज॑ज्ञे॒ सह॑सा यवी॒युत् ॥ (९)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.61.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रजाओं को कष्ट पहुंचाने वाले और अग्नि के समान प्रजाओं को जलाने वाले राक्षस यज्ञ में शीघ्र नहीं आते. नंगे रहनेवाले राक्षस आदि रात में यज्ञ की अग्नि के पास नहीं आते. राक्षसों से युद्ध करने वाले एवं यज्ञ के धारक अग्नि काष्ठों और अन्न को स्वीकार करते हुए बलपूर्वक उत्पन्न हुए. (९)

EN English Translation

Demons who afflict the people and burn the people like agni do not come quickly in the yagna. The naked demons do not come near the agni of yajna at night. Those who fought the demons and the bearers of the yagna were born by force accepting the agni woods and food. (9)

卐 HinduText AI