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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 63 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 13

10.63.13

Mantra ID: 10.63.13

अरि॑ष्टः॒ स मर्तो॒ विश्व॑ एधते॒ प्र प्र॒जाभि॑र्जायते॒ धर्म॑ण॒स्परि॑ । यमा॑दित्यासो॒ नय॑था सुनी॒तिभि॒रति॒ विश्वा॑नि दुरि॒ता स्व॒स्तये॑ ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.63.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अदितिपुत्र देवो! जिन्हें तुम शोभन-मार्गो से ले जाते हो एवं सभी पापों से दूर करके कल्याण प्रदान करते हो, वे सब लोग सभी अनिष्टों से सुरक्षित रहकर वृद्धि प्राप्त करते हैं एवं धर्मकार्यों के पश्चात्‌ संतान की उन्नति पाते हैं. (१३)

EN English Translation

O god of Aditi! All those whom you take from the paths of adornment and give welfare by removing them from all sins, they all get the growth by staying safe from all evils and get the advancement of the child after the righteous works. (13)

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