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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 64 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 13

10.64.13

Mantra ID: 10.64.13

कु॒विद॒ङ्ग प्रति॒ यथा॑ चिद॒स्य नः॑ सजा॒त्य॑स्य मरुतो॒ बुबो॑धथ । नाभा॒ यत्र॑ प्रथ॒मं सं॒नसा॑महे॒ तत्र॑ जामि॒त्वमदि॑तिर्दधातु नः ॥ (१३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.64.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! तुमने पहले अनेक बार जैसा हमारी मैत्री को जाना है, उसी प्रकार इस बार भी जानो. धरती की नाभितुल्य जिस वेदी पर हम हव्य से मिलते हैं, वहां देवमाता अदिति हमारे साथ मित्रता करें. (१३)

EN English Translation

O Maruto! Just as you have known our friendship many times before, know this time too. At the navel-like altar of the earth where we meet Havya, May Devmata Aditi befriend us. (13)

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