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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 64 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 64 • ऋचा / मन्त्र 8

10.64.8

Mantra ID: 10.64.8

त्रिः स॒प्त स॒स्रा न॒द्यो॑ म॒हीर॒पो वन॒स्पती॒न्पर्व॑ताँ अ॒ग्निमू॒तये॑ । कृ॒शानु॒मस्तॄ॑न्ति॒ष्यं॑ स॒धस्थ॒ आ रु॒द्रं रु॒द्रेषु॑ रु॒द्रियं॑ हवामहे ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.64.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम यज्ञ में सोम की रक्षा के निमित्त इक्कीस जल वाली विशाल वनस्पतियों, पर्वतों अग्नि, कृशानु नामक सोमपालक गंधर्व, बाण चलाने वाले गंधर्वो, नक्षत्रों व स्तुतियोग्य रुद्र को बुलाते हैं. (८)

EN English Translation

We call the huge vegetation of twenty-one water, the mountains agni, the sompalak Gandharva named Krishnanu, the arrow-wielding Gandharvo, the nakshatras and the praiseworthy Rudra to protect Som in the yajna. (8)

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