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10.66.4
अदि॑ति॒र्द्यावा॑पृथि॒वी ऋ॒तं म॒हदिन्द्रा॒विष्णू॑ म॒रुतः॒ स्व॑र्बृ॒हत् । दे॒वाँ आ॑दि॒त्याँ अव॑से हवामहे॒ वसू॑न्रु॒द्रान्स॑वि॒तारं॑ सु॒दंस॑सम् ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.66.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अदिति, द्यावा-पृथिवी, महान् सत्य, इंद्र, विष्णु, मरुत्, विस्तृत स्वर्ग, देवों, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों और उत्तम दान करने वाले सूर्य को हम अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं. (४)
EN English Translation
We call aditi, dyava-prithvivi, great truth, indra, vishnu, desert, vast heaven, devas, adityas, vasus, rudras and the sun that gives the best gifts to protect us. (4)