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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 67 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 6

10.67.6

Mantra ID: 10.67.6

इन्द्रो॑ व॒लं र॑क्षि॒तारं॒ दुघा॑नां क॒रेणे॑व॒ वि च॑कर्ता॒ रवे॑ण । स्वेदा॑ञ्जिभिरा॒शिर॑मि॒च्छमा॒नोऽरो॑दयत्प॒णिमा गा अ॑मुष्णात् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.67.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति ने दुधारू गायों की रक्षा करने वाले असुर को हुंकार से इस प्रकार नष्ट कर दिया, जैसे अपने हाथ के आयुध से मारा हो. उन्होंने मरुतों के साथ संयोग की इच्छा करते हुए पणियों को रुलाया और गायों को वापस ले आए. (६)

EN English Translation

Jupiter destroyed the asura protecting the milch cows with a hunkar, as if killed by the armament of his hand. He made the panies cry and brought the cows back, wishing to coincide with the maruts. (6)

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