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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 68 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 68 • ऋचा / मन्त्र 6

10.68.6

Mantra ID: 10.68.6

य॒दा व॒लस्य॒ पीय॑तो॒ जसुं॒ भेद्बृह॒स्पति॑रग्नि॒तपो॑भिर॒र्कैः । द॒द्भिर्न जि॒ह्वा परि॑विष्ट॒माद॑दा॒विर्नि॒धीँर॑कृणोदु॒स्रिया॑णाम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.68.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति ने जिस समय हिंसक बल असुर के आयुधों को सूर्य के समान तेजस्वी तथा अग्नि के समान तृप्त करने वाले आयुरधों द्वारा छिन्नभिन्न किया, उसी समय गायों पर अधिकार कर लिया. जीभ जिस प्रकार दांतों द्वारा काटे हुए पदार्थ का भक्षण करती है, उसी प्रकार बृहस्पति ने बल को मारकर गायों को प्राप्त किया. (६)

EN English Translation

At the time when Jupiter broke the armaments of the asuras by violent force, as bright as the sun and satiating as the agni, jupiter took over the cows at the same time. Just as the tongue feeds on the substance cut by the teeth, so Jupiter killed the force and got the cows. (6)

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