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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 75 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 75 • ऋचा / मन्त्र 9

10.75.9

Mantra ID: 10.75.9

सु॒खं रथं॑ युयुजे॒ सिन्धु॑र॒श्विनं॒ तेन॒ वाजं॑ सनिषद॒स्मिन्ना॒जौ । म॒हान्ह्य॑स्य महि॒मा प॑न॒स्यतेऽद॑ब्धस्य॒ स्वय॑शसो विर॒प्शिनः॑ ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.75.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सिंधु सुख देने वाले एवं अश्वों से युक्त रथ को जोतती है. वह उस रथ के द्वारा अन्न प्रदान करे. यज्ञ में इस रथ की महिमा गाई जाती है. यह रथ अपराजित, स्वाधीन यश वाला तथा महान्‌ है. (९)

EN English Translation

The Indus ploughs a chariot with pleasures and horses. He should provide food through that chariot. The glory of this chariot is sung in the yajna. This chariot is undefeated, independent of glory and great. (9)

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