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10.76.1
आ व॑ ऋञ्जस ऊ॒र्जां व्यु॑ष्टि॒ष्विन्द्रं॑ म॒रुतो॒ रोद॑सी अनक्तन । उ॒भे यथा॑ नो॒ अह॑नी सचा॒भुवा॒ सदः॑सदो वरिव॒स्यात॑ उ॒द्भिदा॑ ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.76.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे पत्थरो! अन्न वाली उषा के आते ही मैं तुम्हें भली प्रकार तैयार करता हूं. तुम सोमरस दवारा इंद्र, मरुत् और द्यावा-पृथिवी को प्रसन्न करी. ये देव हम में से प्रत्येक के घर जाकर सेवा ग्रहण करें एवं घर को धन से पूर्ण कर दें. (१)
EN English Translation
O stones! As soon as usha comes with food, I prepare you well. You pleased Indra, Marut and Dyava-Prithvivi by somras. May this God go to each of us's house and receive service and complete the house with money. (1)