Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 76 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 76 • ऋचा / मन्त्र 2

10.76.2

Mantra ID: 10.76.2

तदु॒ श्रेष्ठं॒ सव॑नं सुनोत॒नात्यो॒ न हस्त॑यतो॒ अद्रिः॑ सो॒तरि॑ । वि॒दद्ध्य१॒॑र्यो अ॒भिभू॑ति॒ पौंस्यं॑ म॒हो रा॒ये चि॑त्तरुते॒ यदर्व॑तः ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.76.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पत्थरो! तुम उत्तम सोमरस प्रस्तुत करो. तुम हाथ से पकड़े जाने पर रोके हुए घोड़े के समान हो जाते हो. सोम निचोड़ने वाला यजमान शत्रु को हटाने वाला बल प्राप्त करता है. यह पत्थर महान्‌ धन पाने के लिए घोड़े भी देता है. (२)

EN English Translation

O stones! You present the best somras. You become like a stopped horse when you are held by hand. The som squeezer host receives the force that removes the enemy. This stone also gives horses to get great wealth. (2)

卐 HinduText AI