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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 77 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 77 • ऋचा / मन्त्र 6

10.77.6

Mantra ID: 10.77.6

प्र यद्वह॑ध्वे मरुतः परा॒काद्यू॒यं म॒हः सं॒वर॑णस्य॒ वस्वः॑ । वि॒दा॒नासो॑ वसवो॒ राध्य॑स्या॒राच्चि॒द्द्वेषः॑ सनु॒तर्यु॑योत ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.77.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! तुम बहुत दूर से संग्रह करने योग्य धन वहन करके लाते हो. तुम उपभोग- योग्य धन को प्राप्त करके शत्रुओं को दूर से ही अलग कर देते हो. (६)

EN English Translation

O Maruto! You bring collectable money from far away. You separate the enemies from a distance by acquiring consumable wealth. (6)

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