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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 14

10.85.14

Mantra ID: 10.85.14

यद॑श्विना पृ॒च्छमा॑ना॒वया॑तं त्रिच॒क्रेण॑ वह॒तुं सू॒र्यायाः॑ । विश्वे॑ दे॒वा अनु॒ तद्वा॑मजानन्पु॒त्रः पि॒तरा॑ववृणीत पू॒षा ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! जिस समय तुम सूर्या के विवाह के विषय में पूछने के लिए तीन पहियों वाले रथ से गए थे, उस समय सभी देवों ने तुम्हारा समर्थन किया था और पूषा ने तुम्हें माता-पिता के रूप में स्वीकार किया था. (१४)

EN English Translation

O aschinikumaro! At the time when you went by a three-wheeled chariot to ask about Surya's marriage, all the gods supported you and Pusha accepted you as a parent. (14)

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