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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 24

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 24

10.85.24

Mantra ID: 10.85.24

प्र त्वा॑ मुञ्चामि॒ वरु॑णस्य॒ पाशा॒द्येन॒ त्वाब॑ध्नात्सवि॒ता सु॒शेवः॑ । ऋ॒तस्य॒ योनौ॑ सुकृ॒तस्य॑ लो॒केऽरि॑ष्टां त्वा स॒ह पत्या॑ दधामि ॥ (२४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वधू! सुंदर मुख वाले सूर्य देव ने तुम्हें जिस बंधन से बांधा था, मैं तुम्हें वरुण के उस पाश से छुड़ाता हूं. मैं तुम्हें पति के साथ सत्य के आधार एवं सत्कर्म के लोकरूप स्थान में निर्विघ्नरूप से स्थापित करता हूं. (२४)

EN English Translation

O bride! I free you from the loop of Varuna with the bondage with which the beautiful-faced Sun God tied you. I establish you freely with the husband in the base of truth and in the lokaform of good deeds. (24)

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