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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 27

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 27

10.85.27

Mantra ID: 10.85.27

इ॒ह प्रि॒यं प्र॒जया॑ ते॒ समृ॑ध्यताम॒स्मिन्गृ॒हे गार्ह॑पत्याय जागृहि । ए॒ना पत्या॑ त॒न्वं१॒॑ सं सृ॑ज॒स्वाधा॒ जिव्री॑ वि॒दथ॒मा व॑दाथः ॥ (२७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वधू! तुम इस पतिगृह में प्यारी संतान के साथ समृद्ध बनो. इस घर में तुम गृहस्थी चलाने के लिए सावधान रहना. इस पति के साथ अपने शरीर का संयोग करो. तुम दोनों बूढ़े होने तक इस घर को अपना कहना. (२७)

EN English Translation

O bride! You be enriched with the beloved offspring in this husbandry. In this house you be careful to run the household. Combine your body with this husband. You both call this house yours until you're both old. (27)

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