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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 31

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 31

10.85.31

Mantra ID: 10.85.31

ये व॒ध्व॑श्च॒न्द्रं व॑ह॒तुं यक्ष्मा॒ यन्ति॒ जना॒दनु॑ । पुन॒स्तान्य॒ज्ञिया॑ दे॒वा नय॑न्तु॒ यत॒ आग॑ताः ॥ (३१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.31 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वधू को प्राप्त स्वर्णरूप उपहार को वहन करने के लिए जो व्याधियां हमारे विरोधियों के पास से आती हैं. यज्ञभाग को ग्रहण करने वाले देव उन्हें वहीं लौटा दें, जहां से वे आई हैं. (३१)

EN English Translation

The diseases that come from our opponents in the form of golden gifts for the bride. The gods who receive the yajnabhag should return them to where they have come from. (31)

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