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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 35

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 35

10.85.35

Mantra ID: 10.85.35

आ॒शस॑नं वि॒शस॑न॒मथो॑ अधिवि॒कर्त॑नम् । सू॒र्यायाः॑ पश्य रू॒पाणि॒ तानि॑ ब्र॒ह्मा तु शु॑न्धति ॥ (३५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.35 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सूर्या का रूप देखो. इसके वस्त्र के लपेटने वाले भाग का रंग अलग है और सिर पर ओढ़ने वाला भाग अलग रंग का है. यह तीन जगह से फटा हुआ है. ब्रह्मा ही इस वस्त्र को शुद्ध कर सकते हैं. (३५)

EN English Translation

Look at the form of Surya. The color of the wrapping part of its garment is different and the part that covers the head is of a different color. It's cracked from three places. Brahma alone can purify this garment. (35)

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