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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 85 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 4

10.85.4

Mantra ID: 10.85.4

आ॒च्छद्वि॑धानैर्गुपि॒तो बार्ह॑तैः सोम रक्षि॒तः । ग्राव्णा॒मिच्छृ॒ण्वन्ति॑ष्ठसि॒ न ते॑ अश्नाति॒ पार्थि॑वः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.85.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! छिपाने के साधन जानने वाले स्तोता लोग तुम्हें छिपाकर सुरक्षित रखते हैं. तुम पत्थरों का शब्द सुनते हो. धरती पर रहने वाला कोई भी मनुष्य तुम्हें नहीं पी सकता. (४)

EN English Translation

Hey Mon! Stotas who know the means of hiding keep you safe by hiding. You hear the word of the stones. No man on earth can drink you. (4)

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