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10.86.1
वि हि सोतो॒रसृ॑क्षत॒ नेन्द्रं॑ दे॒वम॑मंसत । यत्राम॑दद्वृ॒षाक॑पिर॒र्यः पु॒ष्टेषु॒ मत्स॑खा॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.86.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इंद्र का स्वगतकथन-- मैंने स्तोताओं से सोमरस निचोड़ने को कहा, पर उन्होंने मेरी बात नहीं मानी. उन्होंने मेरे स्थान पर मेरे पुत्र वृषाकपि की स्तुति की, सोमरस वाले यज्ञ में स्वामी वृषाकपि मेरे मित्र बनकर प्रसन्न हुए. मैं सबसे श्रेष्ठ हूं. (१)
EN English Translation
Indra's autobiography - I asked the stoes to squeeze the somras, but they did not listen to me. He praised my son Vrishakpi in my place, swami Vrishakpi was pleased to be my friend in the yajna of Somras. I'm the best. (1)