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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 89 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 89 • ऋचा / मन्त्र 7

10.89.7

Mantra ID: 10.89.7

ज॒घान॑ वृ॒त्रं स्वधि॑ति॒र्वने॑व रु॒रोज॒ पुरो॒ अर॑द॒न्न सिन्धू॑न् । बि॒भेद॑ गि॒रिं नव॒मिन्न कु॒म्भमा गा इन्द्रो॑ अकृणुत स्व॒युग्भिः॑ ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.89.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

फरसा जिस प्रकार वृक्षों को काटता है, उसी प्रकार इंद्र शत्रुओं को मारते हैं. इंद्र ने श्रुनगरियों को तोड़ा, वर्षा के जल से नदियों को आकार दिया व पहाड़ों को कच्चे घड़े समान फोड़ा. इंद्र ने अपने साथी मरुतों के साथ जल को हमारे सामने प्रस्तुत किया. (७)

EN English Translation

Just as Farsa cuts down trees, Indra kills the enemies. Indra broke the shrugs, shaped rivers with rainwater and boiled the mountains like raw pitchers. Indra presented the water to us along with his fellow maruts. (7)

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