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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 89 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 89 • ऋचा / मन्त्र 9

10.89.9

Mantra ID: 10.89.9

प्र ये मि॒त्रं प्रार्य॒मणं॑ दु॒रेवाः॒ प्र सं॒गिरः॒ प्र वरु॑णं मि॒नन्ति॑ । न्य१॒॑मित्रे॑षु व॒धमि॑न्द्र॒ तुम्रं॒ वृष॒न्वृषा॑णमरु॒षं शि॑शीहि ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.89.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अभिलाषापूरक इंद्र! जो बुरे लोग मित्र, अर्यमा, मरुद्गण एवं वरुण से द्वेष करते हैं, उन शत्रुओं के लिए तुम अपना गतिशील, कामवर्षक एवं दीप्तिशाली वज्र तेज करो. (९)

EN English Translation

Oh, this desireful Indra! For the enemies of the evil people who hate friends, Ariyama, Marudgana and Varuna, you must intensify your dynamic, workman and glorious thunderbolt. (9)

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