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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 90 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 90 • ऋचा / मन्त्र 4

10.90.4

Mantra ID: 10.90.4

त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑ । ततो॒ विष्व॒ङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.90.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

तीन चरणों वाले विराट्‌ पुरुष ऊपर उठे. उनका केवल एक चरण यहां स्थित रहा. इसके पश्चात्‌ वे भोजन करने वाली एवं भोजन न करने वाली वस्तुओं के रूप में व्याप्त हुए. (४)

EN English Translation

The three-legged giant men rose up. Only one stage of them was located here. After that they became pervasive as food and non-food items. (4)

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