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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 91 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 91 • ऋचा / मन्त्र 6

10.91.6

Mantra ID: 10.91.6

तमोष॑धीर्दधिरे॒ गर्भ॑मृ॒त्वियं॒ तमापो॑ अ॒ग्निं ज॑नयन्त मा॒तरः॑ । तमित्स॑मा॒नं व॒निन॑श्च वी॒रुधो॒ऽन्तर्व॑तीश्च॒ सुव॑ते च वि॒श्वहा॑ ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.91.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ओषधियां उस अग्नि को ऋतु के अनुसार गर्भ के रूप में धारण करती हैं. जलरूपी माताएं अग्नि को जन्म देती हैं. वन की लताएं एवं वृक्ष सदा गर्भयुक्त होकर समान रूप से जन्म देते हैं. (६)

EN English Translation

The herbs hold that agni as a womb according to the season. Water-like mothers give birth to agni. The vines and trees of the forest are always pregnant and give birth equally. (6)

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