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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 92 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 92 • ऋचा / मन्त्र 15

10.92.15

Mantra ID: 10.92.15

रेभ॒दत्र॑ ज॒नुषा॒ पूर्वो॒ अङ्गि॑रा॒ ग्रावा॑ण ऊ॒र्ध्वा अ॒भि च॑क्षुरध्व॒रम् । येभि॒र्विहा॑या॒ अभ॑वद्विचक्ष॒णः पाथः॑ सु॒मेकं॒ स्वधि॑ति॒र्वन॑न्वति ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.92.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्राचीन अंगिरा ऋषि इस यज्ञ में देवों की स्तुति करते हैं. वे पत्थर ऊपर उठाकर यज्ञसाधन सोम को देखते हैं. विशेषदृष्टि वाले इंद्र पत्थरों के शब्द से महान हुए हैं. इंद्र के वज्र ने इस मार्ग में अन्रसाधन जल बरसाया. (१५)

EN English Translation

The ancient Angira sages praise the gods in this yagna. They lift up the stone and look at The Yajnasadhan Som. Indra with special eyesight has been great by the word of stones. Indra's thunderbolt rained water in this route. (15)

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